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" अगर दाए हाथ से कोई काम करो तो बाए हाथ को भी पता नहीं चलना चाहिए" - गिरधारी लाल इन्दौरिया। | सेल्वी


कहते है इन्सान की पहचान उसके कर्मो से होती है,

ऐसे एक कर्मवीर है जिनकी पहचान उनके सादगी भरे जीवन, ज़मीन से जुड़े व्यक्तित्व से हुई, वे है डूंडलोद के गिरधारी लाल इन्दौरिया।


मुंबई में सराहनीय काम करने वाले सोनू सूद को सब जान गए , लेकिन गांव के विकास के लिए अडिग रहकर काम करने वाले कई कर्मवीर गुमनाम रह जाते है। ऐसे एक व्यक्ति है गिरधारी लाल इन्दौरिया।


गिरधारी जी का जन्म 8 अक्टूबर 1974 को झुंझुनू जिले के डूंडलोद गांव में हुआ। अपनी शिक्षा उन्होंने गांव के ही गोयनका विद्यालय से पूरी की , आगे की पढ़ाई के लिए वे कलकत्ता गए और वहां से वाणिज्य में स्नातक की शिक्षा पूर्ण की। इंडियन ऑयल की गैस एजेंसी चलाने वाले यह साधारण से परिवार के व्यक्ति आज पूरे जिले में समाजसेवी और एक कर्मवीर के नाम से जाने जाते है।

शिक्षा, चिकित्सा, और पर्यावरण के क्षेत्र में अपने अटल प्रयासों से आज उन्होंने कई लोगो के जीवन साकार बनाए है।





2003 में उनके पिता के देहांत के बाद उन्होंने गांव के लोगो के लिए अपने काम की शुरुआत की। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनके पिता उनके लिए प्रेरणा स्त्रोत रहे, उनके अनुसार अगर वे इतने सक्षम है कि वे किसी भी व्यक्ति के लिए कुछ कर सके तो संकोच नहीं करना चाहिए।

ऐसी विचारधारा उनके पिता से उन्हे मिली। आज उन्ही के पद चिन्हों पर चलते हुए उन्होंने अपने समाजसेवी जीवन की शुरुआत की।


2005 में उन्होंने लोहागर से निकलने वाली कावड़ यात्रा में जाने वाले लोगो के लिए भंडारे का आयोजन किया और सभी श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराया। 25000 कावड़ यात्रियों को भोजन एवम् पानी उपलब्ध करवाकर भक्ति मार्ग पर चलने वाले यात्रियों कि कठिनाई को कम करने का प्रयास किया। वही उन्होंने इस पहल से लोगो में पुण्य कार्यों के प्रति आस्था को स्थापित किया।


सन 2017 मै उन्होंने बद्री नाथ धाम (उत्तराखंड) मै बद्री विशाल के दरवार में भागवत कथा का आयोजन किया था जिसमें ग्राम डूंडलोद एव आसपास के करीब 200 लोगों की निशुल्क व्यवस्था की थी और भविष्य में भी इसी प्रकार से आयोजन करने के उनके विचार है।




इसी प्रकार बच्चो की शिक्षा में मदद करना, लड़कियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता देना जैसे कई काम किए। पूछे जाने पर कि उन्होंने आज तक कितने विद्यार्थियों की सहायता की वे कहते है, " जब दाए हाथ से कोई काम करो तो बाए हाथ को भी पता नहीं चलना चाहिए "।


शांत स्वभाव के गिरधारी जी अपने शालीनता, और सादगी का परिचय अपने हर जवाब से दे रहे थे।


2010 में उन्होंने गायों के लिए गौशाला निर्माण में सहायता कि, और आज भी रोज़ वे गौशाला में जाकर अपना समय गो माता संग बिताते है।


कोरोना काल में जब शहर में बसे हुए सब लोग गांव आए तब उन्होंने लोगो की आर्थिक सहायता कि और लोगों कि आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए उन्होंने फूड किट्स बंटवाए। हर फूड किट में गेहूं, चावल, तेल, चीनी जैसी सभी ज़रूरी चीजें जो सामान्य रूप में खाने के काम आती है वो दी गई। ऐसी 11500 किट्स लोगो को दी गई। वहीं कुछ ऐसे भी परिवार थे जो आने में असमर्थ थे उन्हे उनके घर तक यह किट्स पहुंचाई।

" कई लोग अपनी स्थिति आसानी से बता नहीं पाते थे, ना ही वे लाइन में खड़े होकर किट लेना चाहते थे, ऐसे में उन्हें उनके दरवाजे पर किट रखकर, घंटी बजाकर हम वापस आए जिससे उन्हे मदद भी मिले और शर्म भी महसूस ना हो" - गिरधारी लाल इन्दौरिया।


साल 2017 में ब्लडकैंप का आयोजन कर जिले में एक साथ 1100 यूनिट ब्लड डोनेशन का रिकॉर्ड बनाया। माना जाता है कभी भी आजतक इतना खून एक साथ नहीं डोनेट किया गया है। ऐसे ब्लडकैंप और कई चिकित्सा शिविरों का आयोजन हर साल किया जा रहा है पिछले 10 सालो से। शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में सिर्फ गांव के लिए नहीं बल्कि पूरे शेखावाटी के लिए काम कर रहे है।


पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए गांव में चाहे किसी का भी जन्मदिन हो, हर व्यक्ति के लिए 11 पेड़ लगाने ज़रूरी है, और इसी तरह आज गांव के मुक्ति धाम के आसपास भी पेड़ो के कारण एक बाग बन गया है। स्कूलों में छायादार, पेड़ अस्पतालों में फूल और छांव देने वाले ऐसे अलग अलग तरह के पेड़ लगाए जाते है।




गिरधारी जी का पूरा परिवार, उनकी पत्नी अनीता, दोनों सुपुत्र अजय(20) यशवंत (22) उनके सभी कामों में उनके साथ खड़े रहते है। देश के प्रति सजग और एक निष्ठावान व्यक्ति होने के सारे फर्ज़ निभाते है, वोटिंग से लेकर लॉकडाउन का कड़ा पालन गांव में कराया गया। डूंडलोद में एक भी कॉरोना का मरीज नहीं पाया गया। युवाओं के लिए वे कहते है कि ," स्वामी विवेकानंद के बताए मार्ग पर चलते हुए सभी को अपने कर्म, लक्ष्य और सफलता के लिए मेहनत और सच्चाई का रास्ता अपनाना चाहिए"।


उनका कहना है, वे इसी प्रकार अपनी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार लोगो के लिए जितना हो सके उतना करते रहेंगे, उनके प्रयास कभी भी खत्म नहीं होंगे।


(सेल्वी पारीक के माध्यम से )

 
 
 
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