©
Search

निगाहें | amisha Rajput

by Amisha Rajput (wtfamisha)


निगाहें गड़ाए रखती हूँ मैं|

कभी चौखट पर|

कभी फ़ोन पर|

कभी किसी के कदमो की आहट पर भागी चली आती हूँ|

कभी उसके इतर की खुशबू अपने बदन पर रगड़ लेती हूँ|

ये सभी बातें सबूत है इस बात की

कि उसके इश्क़ में फ़ना होने से ज़्यादा

मैं उसके इंतज़ार के दरिया में डुबकियां लगाती हूँ|

और उसके गैरहाज़िरी के ज़हर

के घुट भी हँसते हँसते पी लेती हूँ|

नाराज़गी में उसके,

उसकी मनपसंदीदा खीर बनाकर

मेज़ पर रख, उसके घर जल्दी लौट आने के हज़ार सपने बुनती हूँ|

अक्सर देर रात में घर पर दस्तक देता है वो,

मगर फिर भी उसकी कार का हॉर्न सुन

मैं खिड़की से उसका दीदार करने झट से जाती हूँ|

जैसे हो कोई शादीशुदा महिला मैं

और वो हो कोई करवाचौथ का चाँद|

उसकी उतारी हुई क़मीज़ो को पहनकर

अलग आकाशगंगाओ की सेर पर निकल जाती हूँ मैं|

अक्सर एक अनजान खुश्बू

मुझे ख्वाब से हकीकत में ले आती है|

मगर अपने रूआंसेपन को दूर रख

मैं उसकी कमीज से उस महक को दूर भगाने के लिए

हज़ार कोशिश करती हूँ

जैसे कि, महक दूर हो जाने से हकीकत बदल जाएगी|

जितना भी वक्त सामने बिताता है वो मेरे

मैं उसकी हर छोटी आदतों को ध्यान से निहारती रहती हूँ|

और चावल के दाने जब उसके होठो पर लगे रह जाते है, तब तो मैं न जाने कितनी नदियों की तरह पिघल जाती हूँ|

मेरे मन में एक उथल पुथल होने लग जाती है|

जब कभी उसकी उँगलियाँ मेरी से टकरा जाती हैं|

मगर मैं अपने सभी अरमानो को 

अपने हृदय में दबा लेती हूँ|

और उसके होने के एहसास को ही प्रेम समझ, 

मैं प्रेम रस की न जाने कितनी

कविताएं लिख जाती हूँ|

राधा बनने की उम्मीद मन में लिए, 

मैं कई बारी गुलाबी साड़ी पहन लेती हूँ|

माथे पे बिंदी|

और कानो में झुमके पहने, मैं फिर हज़ार सपने बुन जाती हूँ|

मगर हर बार न जाने ये कैसा संयोग है, कि एक अधूरा खाब मन में लिए, 

और इस एकतर्फे इश्क़ के साथ, 

मैं बस मीरा बन 

इन कविताओं के साथ अकेले रह जाती हूँ|

मैं बस मीरा बन 

इन कविताओं के साथ अकेले रह जाती हूँ|

 
 
 
©
©
Performance Art
©
  • YouTube
  • Twitter
  • LinkedIn
  • Facebook
  • Instagram

Stay Up-To-Date with New Posts

Community, Creator, Felicity, Art, Fashion, Photo

submit@createfelicity.com

+91 8822157180

© 2020 Felicity | Creators Community