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Daastan | Virat Dodia

Virat Dodia (@viratdodia )


दास्तान-ए-इश्क़ में,

वो भी कैसा दौर था,


जब तुम कोई और थे,

और मैं कोई और था,


बातों में खामोशी थी,

सिर्फ धडकनों का शोर था,


प्यार छुप छुपा कर ही सही,

पर प्यार घनघोर था,


खामियों से ज्यादा,

खूबियों पे ग़ौर था,


जो कभी एक से थे,

आज वो भी अलग-अलग छोर है,


अब तो उलझे हुए रिश्तो की,

गांठों से बंधी बस एक डोर है,


मंजिल तो दूर ही रहीं,

यहाँ तो रास्ते ही कमजोर है,


न जाने क्या बीती,

सफ़र का ये कैसा दौर है,


अब तुम कोई और हो,

और हम कोई और हैं ।

 
 
 
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